रविवार, 17 अप्रैल 2011

तुम और मैं

तुम और मैं

शक्ति हो तुम शव हूँ 

भक्ति हो तुम भव हूँ 

भाव हो तुम अक्षर हूँ 

अर्थ हो तुम रव हूँ 

शक्ति हो तुम शव हूँ .



शनिवार, 16 अप्रैल 2011

पृथ्वी / Prithvee/

पृथ्वी 

किसी ग्रह से साधकर फेंका गया हैण्ड ग्रेनेड है पृथ्वी 
जो जरा से चूक से 
सूरज के चक्कर में उलझ  गई 
चक्कर लगाती रही और अजीब हो गई;
ऊपर नदियाँ बह रही हैं 
भीतर आग जल रही है
चट्टानें पिघल रही हैं 

कभी तो  पलक भर की चूक होगी 
और 
सूरज से छूटकर उस लक्ष्य ग्रह से जा 
टकराएगी ?

अब यह नहीं जाएगी 
क्योंकि टेररिस्ट पृथ्वी 
माँ बन गई है 
असंख्य जीवों की.

पृथ्वी

 किसी दिन            
केरोसिन में भीगे
 चिथड़े की गेंद सी            
भक से जल जाएगी पृथ्वी ।

2
कहाँ
किस ग्रह पर
 ले जाकर
 धो लाऊँ
पृथ्वी को

3
प्लास्टिक ,पेट्रोल ,काँच ,केमिकल और परमाणु बम
इतने पर भी किस उम्मीद में अटका है तेरा दम ?

4
सौ साल में
पृथ्वी एक्सपायर्
हो जाएगी
मैं खुश हूँ
पृथ्वी पीड़ा मुक्त हो जाएगी
सुख की नींद सो जाएगी ।

5
स्वर्ग में
 मैं पृथ्वी से मिलूंगा
 उसे अपने नये ग्रह पर
बुलाऊंगा
 उसके समापन की कहानियाँ सुनाउंगा
उसे नाश्ते में
पेट्रोल पिलाउंगा
प्लास्टिक खिलाउंगा ।

6
महावराह
अगर पूछेंगे कि क्या किया
उनकी बेटी पृथ्वी का?
तो मैं क्या कहूँगा?
इस से पहले कि दहेज दाह का केस बने
 मैं पृथ्वी का
 प्रवाह कर दूंगा ।

7
लट्टू के गूँज सा
नोक पर संगेमरमरी चमक
सबसे ऊँचा
सबसे ज्यादा जगह जिसमें
आकाश घेरता है
पृथ्वी! एक नन्हा कण ही तो है;
आकाशीय तनाव का
एक क्षण ही तो है ।

अनुपम

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

अन्ना तो गांधी की वापसी है...

एक बूढ़ा आदमी है देश में या यों कहो
इस अँधेरी कोठारी में एक रोशनदान है !

दुष्यंत की इन पंक्तियों के साथ मै अन्ना हजारे के साथ हूँ. देश उनके साथ है. अरेबियन देशों के बाद एशिया में बड़ी क्रांति का बिगुल इन्होने फूंका है. यह गाँधी और सुभाष की सम्मिलित वापसी है. मै अमिताभ बच्चन से भिन्न अपने समर्थन का खुला प्रदर्शन करने में विश्वास रखता हूँ .

यहाँ तक आते आते सूख  जातीं हैं कई नदियाँ
हमें मालूम है पानी कहाँ ठहरा हुआ होगा .

इस ठहरे हुए पानी या महा भ्रष्टाचार का किला तोड़ने में हर आमो खास अन्ना के साथ है.
उनके स्वास्थ्य के लिए शुभकामनायें.

रविवार, 6 फ़रवरी 2011

सपनों को गर्माहट देने में मददगार है बम्बई !


जब सारा नगर सो गया था
मै अँधेरे से आँखें मिलाये जाग रहा था
अँधेरा मेरे कमरे में उजाला उलीच रहा था
सोये हुये नगर में मेरा कमरा रेल की भट्ठी बना हुआ था
जैसे की दुनिया के और भी नगरों में कवियों की आँखें;
जागती आँखें
नींद की प्रहरी बनी होंगी ;
मै जाग रहा था

और जाग रही थी बम्बई !

सपनों को गर्माहट देने में मददगार है बम्बई !



रविवार, 30 जनवरी 2011

ummid


आ गया, 
मेरा भी अर्थ समय आ गया 
बीती जा रही थी जिन्दगी यों ही 
समर्थ समय आ गया !

मंगलवार, 18 जनवरी 2011

नए निर्देशकों के नाम
( डाइरेक्टरस सॉंग )

ऐसी फिल्म बनायें
धन - वर्षा हो जाये,
धन्य-धन्य हो जाएँ।

सुपर हीरो लेवें
ज्यादा धन नहीं देवें
बढ़िया काम कराएँ।

धन्य - धन्य हो जाएँ।


बढ़िया आइटम डालें
बुढ़िया कमर हिला ले
लौंडे शोर मचाएँ ।

धन्य धन्य हो जाएँ।

अर्थकरी विद्याएँ,
हम सब को भी आएँ
ऐसी दाव लगायें ।

धन्य धन्य हो जाएँ।
ऐसी फिल्म बनायें
धन वर्षा हो जाए।


शनिवार, 8 जनवरी 2011

बागी जी की एक ग़ज़ल के चंद शेर

आईने से मुकर गए साहेब
बात क्या थी की डर गए साहेब.
देश सेवा में जब से कूदे हैं
आप कितने संवर गए साहेब.
आप के दांत गिर गए जबसे
आप कितने सुधर गए साहेब.
जयप्रकाश बागी